सुशासन और बिहार
पुल तो आपने बहूत देखें होंगे पर क्या आपने कभी नावों का बना पुल देखा है? अगर देखना है तो आईये बिहार...जी हां, ऊपर तस्वीरें जो आप देख रहें हैं वो बिहार के सहरसा के डुमरी में कोसी नदी पर स्थित नावों का बना पुल है जिस पर लोग पैदल ही नहीं चलते बल्कि बड़ी-बड़ी गाड़ियां भी हिचकोले खाती हुईं इस पार से उस पार आना जाना करती हैं अगर आप अपनी गाड़ी से पुल पार करना चाहते हैं तो 300 रुपए तक ख़र्च करने पड़ सकते हैं इसलिये यात्रा ज़रा मंहगी भी हो सकती है. राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 107 पर स्थित असली डुमरी पुल चुंकि क्षतिग्रस्त हो चुका है इसलिये पुल की मरम्मत करने की बजाय नावों को जोड़ कर अस्थाई रूप से नदी को पार करने का रास्ता बना दिया गया है जोकि भारतीय जुगाड़़ प्रबंधन का भी एक अप्रतिम उदाहरण है.
ये तस्वीरें बिहार में प्रशासनिक स्तर पर हो रही कार्रवाईयों का आईना ही नहीं हैं बल्कि आर्थिक सर्वेक्षणों में दिखाए जा रहे बिहार में तेज़ी से हो रहे विकास दर के आंकड़ों की भी पोल खोल रहे हैं। 14 फरवरी 2014 को जारी बिहार के आठवें आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार बिहार में वर्ष 2012-13 में 14.48 प्रतिशत की दर से विकास हुआ। राज्य ने 2006-13 के दौरान प्रत्येक साल औसतन 12 प्रतिशत की दर से विकास की है और यह विकास की दर अन्य राज्यों की तुलना में भी काफी अधिक है। आंकड़ों में तो बिहार तेजी से विकास के पथ पर अग्रसर दिखाई देता है लेकिन जब असलियत से हमारा सामना होता है तो तस्वीर का रुख कुछ और ही दिखाई देता है। बिहार सरकार को विभिन्न मदों में विभिन्न योजनाओं के लिये केंद्र सरकार के साथ साथ दूसरे कई स्रोतों से भी भारी भरकम धनराशी की प्राप्ति होती है इतना ही नहीं बिहार विभाजन के बाद से राज्य को केंद्र सरकार की ओर से विशेष आर्थिक सहायता भी दी जा रही है। राज्य में सामाजिक कल्याण की कई योजनाएं भी चलाई जा रही हैं लेकिन इन योजनाओं का असर ज़़मीन पर कितना है इसे समझने के लिए इन तस्वीरों में झांकना ज़रूरी है...
जर्जर, टूटी-फूटी सड़कें, सड़कों पर नंगे पैर हाथों में किताबें लिये स्कूल जाते बच्चे, न तो स्कूल बैग है न ही स्कूल यूनिफॉर्म बस कुछ बच्चों की किस्मत अच्छी है जिनके पैरों में चप्पलें हैं और हाथों में झोला भी है...गौरतलब है कि बिहार में मुख्यमंत्री पोशाक योजना, मुख्यमंत्री बालिका साइकिल योजना, मुख्यमंत्री बालक साइकिल योजना के तहत करोड़ों रूपये के बजट का प्रावधान है अब ये राशि कहां और किस तरह खर्च होती है इसकी हक़िकत इन तस्वीरों से साफ पता चलती है। नीतीश कुमार के विकास और सुशासन के दावों के पोल खोलती ये तस्वीरें बिहार की बदहाली की महज एक बानगी भर हैं...जब आप इस राज्य की धरती पर कुछ वक्त गुज़ारते हैं तो महसूस होता है कि बदहाली ने कितनी दूर तक अपना दामन फैला रखा है और मन ये सोचने पर मज़बूर हो जाता है कि अतीत में गौरवशाली और समृद्ध मगध साम्राज्य का वर्तमान किस कदर राजनीति का रणक्षेत्र बन चुका है जहां नेता बस शह और मात के खेल में उलझे रहते हैं और जनता के हिस्से में आता है महज योजनाओं और वादों का जाल साल दर साल...








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